Food for Thought – दिमाग (का) खाना
सच है कि जिन्दगी शतरंज की बिसात नही जहाँ हर कदम चलने से पहले आगे और पीछे की सौ संभावित चालों के बारे में सोंचा जाये…लेकिन जिन्दगी कटी पतंग भी तो नही कि बस हवाओं से सहारे उडे और किसी पेड पर उलझ जाये?
- २/३ साल पहले IIFM में सुने एक व्याख्यान से...
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Nitin Bagla
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[23 Aug 2008 08:33 AM]



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