हरिओम पंवार – मैं घायल घाटी के दिल की धडकन गाने निकला हूं।

इन्द्रधनुष हरिओम पवांर को मैने पहली बार १९९६-९७ के आसपास सुना था। वे वीर रस के कवि हैं। हम ११-१२ वीं कक्षा में थे और हमारे अंग्रेजी के अध्यापक श्री ए पी सिंह के पास इनकी गाई हुई कविताओं की कैसेट थी। “मैं घायल घाटी के दिल की धडकन गाने निकला हूँ”। १२... [पूरी पोस्ट]
writer Nitin Bagla
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[30 Aug 2008 08:54 AM]

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