खुली तिजोरी
हमारी संस्कृति कहती है अतिथि देवो भव। मेहमानों के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिये यह हमें बचपन से ही सिखाया जाता है। आजकल ब्रांड-युग में लोग घुट्टी के बारे में नहीं जानते होंगे नहीं तो कहता कि अतिथि सेवा-सम्मान हमें घुट्टी में पिलाया जाता है। ऐसे अतिथि...
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मथुरा कलौनी
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[27 Dec 2008 04:25 AM]



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