सब कुछ ठीक ठाक है - दूसरा और अंतिम भाग

कच्‍चा चिट्ठा चौथे दिन चंद्रिका ने मुझे विक्टोरिया मेमोरियल बुलाया। अनिच्छित मन से, और भारी कदमो से वहाँ पहुँचा। चंद्रिका पहले ही पहुँच चुकी थी। गंभीर तो वह सदा ही रहती थी। उस समय साधारण से अधिक गंभीर लग रही थी। 'प्रताप मैं तुमसे एक बात कहना चाहती हूँ पर तुम्हें द... [पूरी पोस्ट]
writer मथुरा कलौनी
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[12 Jul 2009 01:08 AM]

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