क्या भगवान को देखा है

parkhinazar समस्याओं की भरमार गरीबी से बेहाल हंै भ्रष्टाचार बढ़ रहा रगं बदलती इस दुनिया में क्या भगवान को देखा है। 2 अन्याय हो रहा मौलिकता खत्म है मानवता का पता नहीं रंग बदलती इस दुनिया में क्या भगवान को देखा है। 3 लालच पल रहा आपस में लड़ते हैं संवेदनओं का पता नही... [पूरी पोस्ट]
writer manoj
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[01 Feb 2009 05:40 AM]

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