चाँद खिलौना तकते थे

अंकित चाँद खिलौना तकते थे। जब यारों हम बच्चे थे। रिश्तों में इक बंदिश है, हम आवारा अच्छे थे। डांठ नही माँ की भूले, जब बारिश में भीगे थे। कुछ नए शेर जोड़ रहा हूँ.................................... पास अभी भी हैं मेरे, तुने ख़त जो लिक्खे थे। ठोकर खा के जाना... [पूरी पोस्ट]
writer अंकित "सफ़र"

अंकित सफ़र

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[06 Oct 2009 05:45 AM]

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