बात करेगा मुद्दे की, पेड़ पका जो इक फल है।
आजकल ज़्यादा वक्त नही मिल पा रहा है, ऍम.बी.ऐ के आखिरी दौर में हूँ(मतलब प्लेसमेंट्स)। एक कोशिश की है कुछ ख्याल आ गए थे और फ़िर कलम रुकी नही....................... जिद में उसकी बादल है। बचपन कितना पागल है। . डूबेगा जो उतरेगा, ख्वाहिश ऐसा दलदल है। . मैं...
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अंकित "सफ़र"
अंकित सफ़र
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[06 Oct 2009 05:45 AM]



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