ख़ुद को भला तो बना

bhardwaj'sblog चार तिनके जुटा घोंसला तो बना; ज़िन्दगी का कहीं सिलसिला तो बना। इक पहल एक रिश्ता बने ना बने, जान पहचान का मामला तो बना। कुछ कदम तुम बढ़े कुछ कदम हम बढ़े, , कर गुजरने का कुछ हौसला तो बना। ज़िन्दगी एक ठहरी हुई झील है, कर तरंगित कहीं बुलबुला तो बना। सन्न स... [पूरी पोस्ट]
writer chandrabhan bhardwaj
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[05 Apr 2009 05:33 AM]

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