आर्य संस्कृति के रक्षक
प्रिया आत्मीय बंधुओं,समय का चक्र अपनी गति से चलता रहता है। उस गति में हर क्षण नित्य नवीन होता है। पुराने क्षण से अलग कुछ नया करने का आह्वान करता है। जीवन को लम्बी यात्रा न मानकर क्षण-क्षण जीने में ही आनन्द है और जो जीवन को भार समझाते हैं, यह कि जीवन...
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Vikram
गुरु वाणी
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[20 Nov 2008 11:45 AM]



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