बारिश में एक कविता
िसतारों-की झिलमिलाती दीपमालिका। अंधेरी सुबह का जुनून बिखरी हुई हवाअों का झोंका। टप-टप बरसती बूँदें अौर सोंधी महक तुम्हारी स्मृति की। बदली अौर तारे एक साथ विरुद्धों का सामंजस्य तुम अौर तुम्हारी याद...
[पूरी पोस्ट]
राम प्रकाश द्विवेदी
13
0
0
0
0
[19 Aug 2009 06:56 AM]



Shuffle








