कब तक चुप बैठें...

मेरा कोना एक दिन तूफान आया...छोटा सा तूफान...इतना सा कि कुछ हल्की किस्म की चीजें उड़ने लगीं...ज़मीन से एक एक बालिस्त उपर...हल्की चीजों को लगा कि अब तो बस स्वर्ग अगर कहीं है तो यहीं हैं..."क्या ज़मीन की धूल भरी जिंदगी"...लेकिन थोड़ी देर बाद तूफान ठहर गया...और व... [पूरी पोस्ट]
writer archana rajhans
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[22 Oct 2008 06:13 AM]

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