सपना और शुरुआत
स्व. वेणुगोपाल जी की ये पंक्तियाँ बहुत दिनों से दिमाग़ में गूँज रही थीं। सोचा आप सभी से बांटता चलूँ। "न हो कुछ भी, सिर्फ़ सपना हो, तो भी हो सकती है शुरुआत। और ये शुरुआत ही तो है, कि वहाँ एक सपना है। "...
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हर्ष प्रसाद
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[03 Nov 2008 02:44 AM]



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