खुशबू है 'वह' विभिन्न रंगों की…!!!
थोड़ा-थोड़ा साथ उसी का, सत्य भी है अखंड भी … मेरे अंगों की खुशबू, मेरा अहंकार है वह … अफसाना भी है वह , कोई तराना भी है … लेखक की कल्पना है वह , कोई कलम की रवानगी भी है कहानी भी है वह , कोई दिलकश प्रेमी का नूर भी … सपना है अहसास और साक्षी है वह कर्तव्य...
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Divine India
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[29 Jul 2007 02:27 AM]



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