तू ही मेरी प्रतीक्षा है…!!!
है वह अनगिनत सुरों की साधना यहाँ से वहाँ … एक छोर से दूसरे तक वादियों में बिछे शबनम की शीतलता मेरे भागते जीवन की आश्ना … किसी संध्या की शांत कहानी की भंगिमा ज़ूस्तजू है या मेरी कल्पना की तृप्ति ' का कोई सोंच हो मेरी या मेरे अनुमानों की मूर्त मीमांसा …...
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Divine India
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[29 Jul 2007 02:27 AM]



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