त्रासदी का समर है…ऐ "परमात्मा" !!!
सुंदर जगत ये सुंदर आवरण अद्भुत प्रकृति पर दिवस का आगमन किस ओर नहीं … हर ओर मौज है चातुर्दिक प्रेम दिव्य संगीत की लय है… ****** विपदा का एक ऐसा मंजर भी आता है तराशी हुई दुनियाँ में भी एक ज्वाला फूट पड़ती है नभ धू - धू करता हुआ उपवन हीं सारा जलता है...
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Divine India
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[07 Jul 2007 05:21 AM]



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