राष्ट्रकवि "दिनकर" जन्मशताब्दी समारोह- एक झलक
न देखे विश्व पर मुझको घृणा से, मनुज हूँ सृष्टि का श्रृंगार हूँ मैं। सुनूँ क्या सिंधु!! मैं गर्जन तुम्हारा स्वयं युग-धर्म का हुंकार हूँ मैं। इन पंक्तियों की प्रखरता को देखकर सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि मैं बात किसकी करने वाला हूँ… इसकारण बताना भ...
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Divine India
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[06 Oct 2007 16:29 PM]



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