"दिनकर"… एक बलंद आवाज ।

Divine India बढ़कर विपत्तियों पर छा जा, मेरे किशोर! मेरे ताजा! जीवन का रस छन जाने दे,तन को पत्थर बन जाने दे। तू स्वयं तेज भयकारी है, क्या कर सकती चिनगारी है?" राष्ट्रकवि 'दिनकर' विरचित ये पंक्तियाँ आम मानव में भी विशिष्टता का बोध कराने सकने में सक्षम है… विगत कुछ... [पूरी पोस्ट]
writer Divine India

अनंत मन टटोल…

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[24 Oct 2007 03:55 AM]

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