मैं हूँ यही मेरा है नव-निर्माण…
नियती नहीं मेरा किसी सोये हुए इतिहास का उद्घोषणा प्रकृति का नवीन वर्तमान हूँ… मन की उदास वृत्ति बेचैन शोक का नाद नहीं राह दृष्टांत धवल ज्योति का पूँज हूँ … गहन अंधकार निस्तेज आवरण अविद्या शरणार्थी नहीं प्रस्फुटित काया प्रज्ञा भूषित क्रांति का पुत्र ह...
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Divine India
दर्शन की बूंद पड़ी…
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[25 Jun 2008 15:32 PM]



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