इस दौर के लिए अफ़सोस भी..शुकराना भी
चुनाव निपट गए.. कुछ नेता निपट गए और मुद्दे की बात जनता फिर निपट गयी । दुनिया भर की मंदी के बीच भारत में फैलते चुनावी कारोबार को देखकर एकबार लगा मंदी हमारे यहाँ तो है ही नहीं। यही मुगालता पाल लें, चलिए कुछ देर के लिए, पर कबूतर के बिल्ली को देखकर आँख ब...
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DUSHYANT
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[16 May 2009 07:04 AM]



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