च -- चरखा

ननिहाल च कहता है चाँद बनो तुम , चाँद जैसे काम करो तुम , जब सूरज डूब जाता है , अंधकार फैल जाता है , तब चाँद आ जाता है , रोशनी कर जाता है। _______________ च से चरखा होता है, इससे सूत बनता है, गाँधीजी इसे चलाते थे, स्वदेशी की बात बताते थे। ________________ ___... [पूरी पोस्ट]
writer प्रभाकर पाण्डेय
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[27 Nov 2008 08:33 AM]

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