"मौसम" पर एक कविता

Chhutpan ki Kavitayen सूरज तपता, धरती जलती गरम हवा जोरों से चलती तन से बहुत पसीना बहता हाथ सभी के पंखा रहता आरे बादल, काले बादल गरमी दूर भगा रे बादल रिमझिम बूँदें बरसा बादल झम-झम पानी बरसा बादल ले घनघोर घटायें छाईं टप-टप, टप-टप बूँदें आईं बिजली लगी चमकने चम्-चम् लगा बरसने... [पूरी पोस्ट]
writer Vibha Rani

मौसम

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[25 Aug 2008 13:35 PM]

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