एक सफ़ेद कबूतर
इस बार एक कविता हर्ष की, जिसे उनके ब्लॉग से लेकर इधर दे रही हूँ आप सबके लिए। एक सफ़ेद कबूतर, उसके दो पर, एक इधर, एक उधर। दो व्यक्ति, पहने हुए, सफ़ेद धोती, सफ़ेद कुर्ता,सफ़ेद टोपी, एक सफ़ेद कबूतर के इधर, एक उधर, नोचने को तैयार, सफ़ेद कबूतर के पर। अगली...
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Vibha Rani
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[31 Oct 2008 03:01 AM]



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