चंदा मामा दूर के,
यह कविता भी हमें रेखा दी के सौजन्य से मिली है। हालांकि यह बहुत पुरानी कविता है और लगभग सभी को पाता है, फ़िर भी इसे यहाँ देने का अपना लुत्फ़ है। चंदा मामा दूर के, पुए पकाए गुड के , आप खाए थाली में, मुन्ने को दें प्याली में, प्याली गयी टूट, मुन्ना गया र...
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Vibha Rani
बाल कविता
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[06 Nov 2008 02:34 AM]



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