ताजे दोहे
दिल्ली :-देत दुहाई जो रहे , मानव के अधिकार |निरस्त पोटा कर दिया ,मनमोहन सरकार ||
नीर समान बहता रहा,निर्दोषों का खून |बस वोटों के लोभ में ,टांग दिया क़ानून ||
हमले आतंकी हुए ,बढ़ने लगा दबाब |तब जाके जागे कहीं, टूटे लोभ के ख्वाव ||
नए नाम नई जिल्द में...
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प्रदीप मानोरिया
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[20 Dec 2008 23:58 PM]



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