मोहब्बत - रूहानी ज़ज्बा

HINDI KAVYA MANCH गुलशन में र वानी है , और रुत भी सुहानी है |नहीं ज़ज्बा -ए-इश्क अगर ,फिर कैसी जवानी है ||नहीं चैन कहीं मिलता , आँखे भी उनींदी हैं |नज़रों में बसी सूरत ,ये इश्क निशानी है ||आह्ट हो जरा कोई , आमद सी लगे उनकी |नगमा ये मोहब्बत का, उल्फत की कहानी है ||इज़ह... [पूरी पोस्ट]
writer प्रदीप मानोरिया
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[27 Jun 2009 00:34 AM]

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