जरा सी बात है मुँह से निकल न जाये कही

विचारों  की जमीं- Land of Thoughts नजर नवाज नज़ारा बदल न जाये कही। जरा सी बात है मुँह से निकल न जाये कही, वो देखते है तो लगता है नींव हिलती है , मेरे बयान को बंदिश निगल न जाये कही। यों मुझको खुद पे बहुत ऐतबार है लेकिन , ये बर्फ आंच के आगे पिघल न जाये कही । तमाम रात तेरे मैकदे में मय पी... [पूरी पोस्ट]
writer राज यादव
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[19 Dec 2007 22:23 PM]

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