मुझे खोने से डरता था
मेरी आखों पे मरता था मेरी बातों पे हँसता था नाजाने शख्स था वो कैसा मुझे खोने से डरता था मुझे जब भी वो मिलता था यही हर बार कहता था सुनो !!!!! अगर मैं भूल जाऊं तो, अगर मैं रूठ जाऊं तो कभी वापिस न आऊं तो भुला पाओगे ये सब कुछ यूँही हँसती रहोगी क्या यूँही...
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राज यादव
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[15 Mar 2008 13:15 PM]



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