मुद्दत

kuch sapno ki khatir हाँ ,चांद ज़रा ये बतलाना वो चांद वहाँ पर कैसा है ? मुद्दत हो गयी देखे उसे क्या हाल वहाँ पर उसका है ? क्या अब भी उसकी मीठी बातें मीठा रस कानों में घोलती हैं ? क्या अब भी उसकी खामोश आंखें चुप रह कर भी सब बोलती हैं ? क्या अब भी मेरी आशाओं का चेहरा उसके च... [पूरी पोस्ट]
writer शिवानी
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[28 May 2008 15:03 PM]

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