तर्ज़-ए-हयात
न कहीं ज़िक्र है , न कोई बात है कितनी अजीब ये रात है ! हर दिन गुज़ारा तेरी याद में तू ही मेरी तर्ज़ -ए -हयात है ! तुझे याद हो कि न याद हो मेरे दिल में एक ही बात है ! तेरे नाम से दिल ये धड़कता है तेरे दम से ये कायनात है !...
[पूरी पोस्ट]
शिवानी
6
0
0
0
0
[02 Jul 2008 06:23 AM]



Shuffle








