अनजाने राही

kuch sapno ki khatir न मैं तुमको कुछ कह सकी न तुम ही मुझको समझ सके ! और बस यूं ही हम दोनों जिंदगी का सफर तय करते रहे ! चलती रही यूं ही जिंदगी यूं ही बस दिन कटते रहे ! और हम अपने ग़म के आंसू पीते रहे और जीते रहे ! कोशिश कि कभी जो हमने तुमने कब उसपे गौर किया ! बेदर्दी से म... [पूरी पोस्ट]
writer शिवानी
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[28 May 2008 15:22 PM]

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