उसकी राधा
मैंने कुम्हार से विनती करके उससे कुछ चिकनी मिटटी मांगी ! ला कर थोडा प्यार का पानी अरमानों का घोल बना कर बडे प्यार से उसको रखा ! फिर ख़्वाबों का चाक बना कर समय के चक्र सेउसे घुमा कर एक प्यारी मूरत घड़ डाली ! ममता की धूप में उसे सुखा कर चाहत के रंग दे ड...
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शिवानी
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[02 Jun 2008 13:37 PM]



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