इंतज़ार

kuch sapno ki khatir है मुझे इंतज़ार उस दिन का जिस दिन किसी की नफरत बदल जाएगी चाहत में ! हो जाएंगे दूर सब गिले शिकवे और बंध जाएंगे फिर सब रिश्ते प्यार के धागे में ! जानती हूँ ऐसा सोचना मेरे लिए एक हसीं ख्वाब सा है , और ख़्वाबों में जीना एक आदत सी बन कर रह गई है ! बैठी हूँ... [पूरी पोस्ट]
writer शिवानी
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[08 Jul 2008 12:56 PM]

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