दगा

kuch sapno ki khatir दोस्त बन कर तुमने अपनी ही दोस्ती को दगा दिया , तुमसे तो दुश्मन भले जो दुश्मनी तो निभाते हैं ! गंगा की तरह पाक समझा था तुम्हे हमने ! करके मैला दोस्ती को ,तुमने गंगाजल को नापाक किया ! कहते थे बड़े नाज़ से हम हीरा है दोस्ती अपनी ! कमबख्त तब कहाँ जानते थे... [पूरी पोस्ट]
writer शिवानी
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[01 Aug 2008 04:30 AM]

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