कुछ सवालात
गुज़र चुकी जिंदगी की रातें क्यूँ न सुबह का इंतज़ार करें ! बहुत हो चुकी तकरार की बातें क्यूँ न प्यार का इज़हार करें ! मौत तो मिल जायेगी बिन मांगे क्यूँ न जिंदगी से दो बात करें ! ढूंढ रहे हैं हम,कहाँ खो गए तुम क्यूँ न हम तुमसे मुलाक़ात करें ! बहुत थक चुक...
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शिवानी
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[08 Sep 2008 03:23 AM]



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