वह पीला गुलाब
फ़िर आसमान से सूरज उतरा धरती पर लालिमा छाई ! पंछी उड़ चले नभ की ओर मैंने भी घर की खिड़की खोली ! बाहर छोटी सी बगिया थी ! मंद,मंद हवा के झोंके बुला रहे थे अपनी ओर ! अनायास मैं निकल पड़ी फ़िर हरी घास थी जैसे मखमल हर पौधे की हिलती डाली लगता मुझको बुला रही थी...
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शिवानी
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[08 Oct 2008 12:06 PM]



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