हमने चाहा हम भी लिखदें दिल की बात किताबों में
हमने चाहा हम भी लिखदें दिल की बात किताबों में पर महबूबा के उस आंचल की, संगीत भरी छम छम पायल की हर बात बता कैसे पऊंगा, शायद मैं न लिख पाऊंगा उसने जो नजरों से बोली वो हर बात किताबों में हमने चाहा हम भी लिखदें दिल की बात किताबों में कान तरसते सुनने को आ...
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योगेश समदर्शी
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[19 Jul 2007 00:32 AM]



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