जमाने से
आओ कुछ ऐलान सा करदें हम भी आज जमाने से हर रिश्ता रिश्ता होता है, केवल मित्र निभाने से हमको अपनी सोच के जैसा एक खिलोना मिला नहीं बाग में मेरे कोई अनोखा फूल सलोना खिला नहीं नहीं धूप से बच पाओगे धूप धूप चिल्लाने से नई जीत की राह मिलेगी हार से हाथ मिलाने...
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योगेश समदर्शी
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[20 Jul 2007 00:31 AM]



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