अहसासों की बात न कर
है भीड भरा ये शहर यहां पर अहसासों की बात न कर इन गर्म मिजाजी लोगों से, ठंडी सांसों की बात न कर पोखर, नदियां, ताल, जलाशय सब उनके कब्जे में आऐ बिजली बनने दे पानी से तू अब प्यासों की बात न कर रिश्ते सब पैसों की खातिर देख गुलामी झेल रहे हैं जब हाथ हाथ से...
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योगेश समदर्शी
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[24 Jul 2007 02:15 AM]



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