जिंदगी तलाशता रहा हूं मैं

शब्द सृजन खुद को ही तराशता रहा हूं मैं जिंदगी तलाशता रहा हूं मैं उसके सुख को प्यार जो भी कह सके दिवानगी तलाशता रहा हूं मै अब हुनर की कद्र करता कौन है बंदगी तलाशता रहा हूं मैं उच्चता विचार की है खो रही सादगी तलाशता रहा हूं मैं जिसको मिलके दिल वाह वाह कहे बानगी... [पूरी पोस्ट]
writer योगेश समदर्शी
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[08 Aug 2007 01:44 AM]

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