कुछ बात कर
आज के हालात पर कुछ बात कर आज टूटे हाथ पर कुछ बात कर मै पिता से दूर हूं क्योंकर भला एक बयां के घोंसले की बात कर गांव का बरगद बुजुर्गों का कहा बदहाल से अब होंसलों की बात कर है पेट की पीडा रिवाजों से बडी त्योहार के इस फांसले की बात कर आंगन मे उगी दीवार...
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योगेश समदर्शी
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[19 Sep 2007 00:20 AM]



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