यह जमीं है गांव की

शब्द सृजन गौर से देखो इसे और प्यार से निहार लो आराम से बैठों यहा पल दो पल गुजार लो सुध जरा ले लो यहां पर एक हरे से घाव की कि यह जमीं है गांव की, हां ये जमीं है गांव की...... कुल कुनबा और कुटुम का अर्थ बेमानी हुआ ताऊ चाचा खो गये सब खो गई बडकी बुआ गांव भर रिश्तो... [पूरी पोस्ट]
writer योगेश समदर्शी
views
4
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[20 Sep 2007 03:09 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix