कुछ तो बात बात बस बात बात की खाते हैं

शब्द सृजन कुछ तो बात बात बस बात बात की खाते हैं कुछ मेहनत सौ की दो पाकर पछताते हैं मूल ने अपना दाम खो दिया, चमक दमक का लगता मोल. आलू १० का धडी तुलेगा चिप्स बिके चांदी के मोल एक वक्त में रुपये हजारों खाते कुछ कुछ ऐसे हैं जो पानी पी सो जाते है. श्रम देवता खडा खड... [पूरी पोस्ट]
writer योगेश समदर्शी
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[15 Feb 2008 03:37 AM]

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