जीवन सन्दर्भ
बिना बातआपके साथ कैसी है पहेली बार बार सोचता हूँ कि जिंदगी ऐसी उलझनों , भरी,मुश्किलों भरी क्यों है ?आख़िर क्यों जी जाए ऐसी जिंदगी जहाँ आदमी आदमी को खाने पर तुला है ,कोई जी भी नही पारहा पर जीने भी नही दे रहा. स्नेह नही ,विश्वास नही ,अपनेपन की डोर डोर...
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डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह
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[26 Aug 2009 23:20 PM]



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