मूसीकी़ की हसीन दुनिया में चमकता हुआ आफ़ताब - मोहम्मद रफ़ी

दिलीप के दिल से शमा - ए - रफ़ी के परवानों ....... आखिर फ़िर वही मनहूस ३१ जुलाई आ ही गयी. फ़िर वही मकाम आया है आज, जिससे गुज़रना हमारे दिलों पर फ़िर खंजर चलने से कम नहीं.आज ही के दिन हमारे मूसीकी़ की हसीन दुनिया में चमकता हुआ आफ़ताब गुल हो गया और छा गयी ऐसी तारीकी, कि आज त... [पूरी पोस्ट]
writer दिलीप कवठेकर

मोहम्मद रफ़ी

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[03 Aug 2009 10:05 AM]

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