अम्मा की रसोई
अम्मा की रसोई में सुबह शाम जलता चूल्हा, बच्चों का उपर नीचे कूदना, किसी का झिड़की खाना तो किसी का आंचल में छुप जाना, दिन गुज़रता था ऐसे हर पल सँवरता हो जैसे। कितने प्रश्न अम्मा के सामने जा बैठते थे, अम्मा उन्हें हर कोने से उठा कर तरतीब से लगाती थी, जैसे...
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रजनी भार्गव
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[03 Dec 2007 16:14 PM]



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