सवाल

रजनीगन्धा वो पल वहीं ठहर गया था, जिस पल खिड़की से छनती धूप ने, तुम्हे हताश और निढाल पाया था, मेरी आँखों से कुछ सवाल करते पाया था। वो सवाल अभी भी उघड़े पड़े हैं, उस पोस्टकार्ड की तरह जो आया था पहाड़ियों की बर्फ से भीग कर, दराज़ में अब भी पड़ा है कुछ सिकुड़ा हुआ। चलो,... [पूरी पोस्ट]
writer रजनी भार्गव
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[08 Feb 2008 11:55 AM]

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