होली- कुछ चित्र

रजनीगन्धा खुलते जाते सब गठबँधन आसमान से हटते पहरे जब से फागुन ले कर आया पीत पराग रँग कुछ गहरे। --- पीली हल्दी, सजी किनारी खिली धूप की चादर ओढ़ी आँगन पूरा हरसिंगार सा और वसंत खड़ी है ड्योढ़ी। --- पच पच पच करती पिचकारी रँगों की बहती फुलवारी मल गुलाल सिहरी दोपहरी मे... [पूरी पोस्ट]
writer रजनी भार्गव
views
8
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[21 Mar 2008 13:26 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix