मेरे अपने सपने

रजनीगन्धा मेरे सपने मेरे अपने हैं, कोई भी इस हाशिए पर लिखे ये फ़िर भी मेरे अपने हैं. मौजों पर सवार ये तख्ती, बहुत थपेड़े सहती है. क्षितिज तक पहुँचने की चाह में खुद ही मीलों तक बहती है. _________________... [पूरी पोस्ट]
writer रजनी भार्गव
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[16 May 2008 21:18 PM]

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