कुछ हायकु

रजनीगन्धा टूटते तारे लान में लेटे हुए अगस्त माह गाँव में चाँद बावड़ी में भीगा है अमा आ गई धुला सूरज जंगले आती धूप चाय की चुस्की गरजे मेघ कानाफ़ूसी करते ऊँचे शीशम नन्ही मछली पोखर है हाथ में जमी है काई मेपल पत्ती डायरी के पन्ने झड़ रहे हैं __________... [पूरी पोस्ट]
writer रजनी भार्गव
views
7
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[02 Oct 2008 00:02 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix