सुना है…….
सुना है वक़्त के पंख हुआ करते हैं….
कुछ लम्हों में हमने इसे ठहरे हुए देखा है.
किसी की ज़ुल्फ़ो में अटके हुए देखा है
झील सी आँखों में भटकते हुए देखा है…..
बहुत तेज़ी से निकल गया जब भी रोकना चाहा इसको,
सारी यादें साथ ले गया समेटना चाहा जिनको.
पर वो कुछ...
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Gaurav Sangtani
dreamsgauravख्वाब
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[01 Sep 2007 02:24 AM]



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